देश में गंदे पानी से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कई इलाकों में दूषित पानी मिलने की खबर आई है। नगर निगम की जांच रिपोर्ट में चार स्थानों के भूजल में E. coli बैक्टीरिया पाए जाने की पुष्टि हुई है। इनमें खनूगांव, आदमपुर कैंटोनमेंट और वाजपेयी नगर शामिल हैं। कुछ दिन पहले यही बैक्टीरिया इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में भी पाया गया था, जहां गंदा पानी पीने से करीब 20 लोगों की मौत हो गई थी।
नगर निगम ने पूरे शहर में 1,810 पानी के सैंपल की जांच की है और टीमें लगातार पानी की सप्लाई पर नजर रखे हुए हैं। इससे पहले गुजरात के गांधीनगर में भी गंदा पानी पीने से 100 से ज्यादा लोग बीमार पड़ गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
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जांच में क्या आया सामने?
भोपाल नगर निगम के अधिकारियों ने यह साफ किया है कि पाइप से आने वाला पानी सुरक्षित है। इन्फेक्शन केवल भूजल श्रोतों तक सीमित है। शहर की ट्रीटेड, पाइप वाली पानी की सप्लाई पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। इंदौर की हाल की घटना से सीख लेते हुए निगम ने अपनी निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि लापरवाह ऑफिसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी डिस्ट्रीब्यूशन लाइनों की अच्छी तरह से जांच की जा रही है। यह भी कहा गया है कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कदम उठाने का वादा किया है।
भोपाल की मेयर मालती राय ने ANI को बताया, भोपाल नगर निगम ने अब तक 1810 सैंपल लैब में भेजे हैं। लैब में भेजने के बाद उनकी जांच की गई। चार सैंपल में बैक्टीरिया पाए गए। ये अंडरग्राउंड पानी के सैंपल थे, जो ट्यूबवेल से लिए गए थे। ट्यूबवेल से मिले सैंपल कच्चे पानी के थे। वह पानी भोपाल के लोगों को सप्लाई नहीं किया जाता है।
आगे उन्होंने कहा, 'नगर निगम को अलग-अलग जगह से शिकायतें मिल रही हैं। नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी तुरंत जगहों पर जाकर टेस्ट कर रहे हैं। अगर कोई शिकायत होती है, तो नगर निगम की टीम मौके पर पहुंचकर समस्या को ठीक कर रही है। अगर कहीं लीकेज है या लोगों की शिकायतें हैं, तो नगर निगम के अधिकारी और कर्मचारी जांच कर रहे हैं। लोगों की शिकायतों के आधार पर जांच कर रहे हैं और सैंपल संबंधित अधिकारियों को भी भेज रहे हैं।'
कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने जबलपुर के ग्वारीघाट में नर्मदा नदी में कथित तौर पर सीवेज का पानी मिलने पर चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि दूषित पानी लोगों को सप्लाई किया जा रहा है और अगर तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो कोई बड़ी घटना हो सकती है।
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समस्या क्या है?
नर्मदा, कोलार, अपर लेक (बड़ा तालाब) और केरवा जैसे प्रमुख स्रोतों से आने वाले पानी को पहले फिल्ट्रेशन प्लांट में शुद्ध किया जाता है और फिर घरों तक पहुंचने के बाद दोबारा उसकी जांच की जाती है। सावधानी के तौर पर, फिलहाल उपयोग में न आने वाले 264 ट्यूबवेल के पानी की भी जांच की गई है।
शहर में कई जगह लोहे की पाइपलाइनें अपनी तय उम्र पूरी कर चुकी हैं, जिससे उनमें लीकेज का खतरा बना रहता है और गंदा पानी सप्लाई में मिल सकता है। इस पुरानी व्यवस्था को बदलने के लिए करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अभी शहर के कुल 2.71 लाख नल कनेक्शन में से लगभग 75 हजार को बदलने की जरूरत है। AMRUT 2.0 योजना के तहत इन समस्याओं को दूर करने के लिए पूरे शहर में 750 किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है।
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