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स्टॉक मार्केट क्रैश: ट्रंप के टैरिफ का डर या कुछ और, जानें वजह

स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से लेकर और कई वजहें हैं। जानें।

Representational Image। Photo Credit: PTI

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: PTI

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स्टॉक मार्केट के लिए मंगलवार का दिन अच्छा नहीं रहा। इस दिन बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 में भारी गिरावट देखने को मिली। जबकि बीएसई इंडेक्स 1400 प्वाइंट्स गिर गया तो वहीं निफ्टी 50 गिरकर 23,200 के नीचे पहुंच गया।

 

वहीं दोपह को 2 बजकर 27 मिनट पर बीएसई सेंसेक्स 76,008.56 पर चल रहा था जो कि पहले की तुलना में 1406 प्वाइंट नीचे था। वहीं निफ्टी 50 23,155 के प्वाइंट पर था जो कि पहले की तुलना में 364 प्वाइंट नीचे था।

 

दूसरे दिन दिखी गिरावट

भारत ीय इक्विटी मार्केट में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट मूल रूप से आईटी और बैंकिंग सेक्टर में गिरावट के कारण देखने को मिली। यह भी कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रस्तावित रेसिप्रोकल टैरिफ की वजह से भी मार्केट के सेंटीमेंट में निगेटिविटी देखने को मिली।

 

ऑटोमोटिव सेक्टर को छोड़कर बाकी के सारे सेक्टर्स में निगेटिव परफॉर्मेंस देखने को मिली। निफ्टी आईटी, रियलटी, फाइनेंशियल और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर में 1-3 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।

 

एक रिपोर्ट के मुताबिक बीएसई-लिस्टेड कंपनियों में 1.25 लाख करोड़ से लेकर 411.62 करोड़ की गिरावट देखने को मिली। 

 

आज क्यों क्रैश हुआ स्टॉक मार्केट?

1. रेसिप्रोकल टैरिफ

ट्रंप ने 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने की घोषणा की थी, जिसे ट्रंप ने 'लिबरेशन डे' बताया था। ट्रंप के इस ऐलान से ऐसा लगा कि यह सारे देशों को प्रभावित करेगा जिससे पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी आ सकती है।

 

2. आईटी सेक्टर पर दबाव

अमेरिकी मार्केट एक्सपोजर के कारण आईटी फर्म्स में 1.8 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। साथ ही इसके पहले मार्च में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी जिसने निफ्टी 50 की परफॉर्मेंस पर असर डाला।

 

एक एक्सपर्ट के मुताबिक, 'हमें उम्मीद है कि वित्तीय वर्ष 2026 के लिए आईटी फर्म्स का परफॉर्मेंस निराशाजनक रहने वाला है। '

 

3. तेल की कीमतें एक स्तर तक पहुंची

तेल की कीमतें पांच हफ्ते के शीर्ष पर पहुंच गई हैं जिससे महंगाई बढ़ने को लेकर लोगों में चिंताएं बढ़ रही हैं। कच्चे तेल की कीमतें 74.67 डॉलर पर रहीं जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) 71.37 डॉलर पर रहा। तेल की बढ़ी हुई कीमतें भारत के राजस्व घाटे और कंपनी के प्रॉफिट मार्जिन को घटाएगा।

 

4. मार्केट कन्सॉलिडेशन

साल के आठ सेशन में निफ्टी और सेंसेक्स में गेन देखने को मिला जिसकी वजह से कुछ ट्रेडर्स ने प्रॉफिट बुक करने के लिए भी अपना शेयर बेच दिया जिससे मार्केट में बहुत ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।

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