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बंगाल में बीजेपी सरकार की तैयारी, कौन-कौन हैं CM पद के दावेदार?

पश्चिम बंगाल में अब बीजेपी की सरकार बनना लगभग तय है और मुख्यमंत्री पद के दावेदारों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। शुवेंदु अधिकारी से लेकर दिलीप घोष तक कई नाम चर्चा में हैं।

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सुवेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और सुकांत मजूमदार, Photo Credit: ChatGPT

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पश्चिम बंगाल में इक्लेक्शन काउंटिंग जारी है लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार बनना लगभग तय है। ऐसे में सवालों का सिरा अब एक नए कयास से जुड़ रहा है। बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? पार्टी ने चुनाव से पहले किसी एक चेहरे को आगे नहीं किया। नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नाम पर वोट मांगा गया लेकिन अब, जब कुर्सी सामने है तो कई नाम चर्चा में हैं। आइए एक-एक करके देखते हैं कि वे नाम कौन से हैं और हर नाम के साथ क्या समीकरण जुड़ा है।

 

सबसे पहला नाम है शुभेंदु अधिकारी का। यह वही शुभेंदु हैं जो कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगी थे। 2007 के नंदीग्राम आंदोलन में जब लेफ्ट सरकार ने ज़मीन अधिग्रहण की कोशिश की थी, तब शुभेंदु ज़मीन पर रहकर तृणमूल का संगठन खड़ा कर रहे थे। वह आंदोलन ही ममता को सत्ता तक लेकर आया लेकिन दिसंबर 2020 में शुभेंदु ने तृणमूल छोड़कर बीजेपी का दामन थामा। 2021 के चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट पर खुद ममता बनर्जी को हरा दिया। पिछले पांच साल से वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इस बार वह दो सीटों से लड़ रहे हैं, नंदीग्राम और भवानीपुर। भवानीपुर में सीधी टक्कर फिर से ममता से है। ताज़ा रुझान कह रहे हैं कि नंदीग्राम में शुभेंदु आगे हैं, भवानीपुर में मुक़ाबला करीबी है। अगर बीजेपी सरकार बनाती है तो शुभेंदु अधिकारी सबसे आगे का नाम माने जा रहे हैं।

 

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शमिक भट्टाचार्य भी हैं दावेदार

 

दूसरा नाम है शमिक भट्टाचार्य का। 61 साल के शमिक राज्य बीजेपी के मौजूदा अध्यक्ष हैं। जुलाई 2025 में उन्हें इस पद पर बैठाया गया था। शमिक की पहचान RSS के पुराने स्वयंसेवक की है और उन्हें पार्टी के अंदर एक नरम, बौद्धिक चेहरे के तौर पर देखा जाता है। कुछ लोग उनकी तुलना अटल बिहारी वाजपेयी की शैली से करते हैं। वह 2014 में बशीरहाट दक्षिण उपचुनाव जीतकर बंगाल में बीजेपी के पहले विधायक बने थे। अभी वह राज्यसभा सांसद भी हैं। अगर बीजेपी को कोई बंगाली भद्रलोक चेहरा चाहिए, मतलब बंगाल के शिक्षित और सांस्कृतिक तबके को साधने वाला चेहरा, तो शमिक का नाम मज़बूत है।

दिलीप घोष भी करेंगे दावा

तीसरा नाम है दिलीप घोष का। दिलीप घोष ने 2016 में राज्य बीजेपी की कमान संभाली थी, उस समय जब विधानसभा में पार्टी के पास सिर्फ़ 3 विधायक थे। उनके नेतृत्व में 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बंगाल की 42 में से 18 सीटें जीतीं। वह आज तक राज्य में पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन है। 2021 की हार और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद वह कुछ समय पार्टी से दूर हो गए थे लेकिन इस साल जनवरी में अमित शाह की मुलाकात के बाद वो वापस सक्रिय हो गए। इस बार वह खड़गपुर सदर सीट से लड़ रहे हैं और रुझानों में आगे हैं। ज़मीनी कार्यकर्ताओं में उनकी पकड़ मज़बूत मानी जाती है।

 

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सुकांत मजूमदार का प्रोफाइल भी मजबूत

चौथा नाम है सुकांत मजूमदार का। वह बालुरघाट से लोकसभा सांसद हैं और मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री हैं। शिक्षा और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, इन दो विभागों का ज़िम्मा उनके पास है। 2021 से 2025 तक वह राज्य बीजेपी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अगर पार्टी उत्तर बंगाल से कोई चेहरा चुनना चाहे, जो उसका मज़बूत गढ़ माना जाता है, तो सुकांत का नाम विचार में आ सकता है।

 

पांचवां नाम है स्वपन दासगुप्ता का। वह पहले पत्रकार थे और बाद में बीजेपी से जुड़े। 2021 के चुनाव से पहले वह राज्य बीजेपी की रोज़मर्रा की गतिविधियों में सक्रिय रहे। उनकी पहचान भी एक भद्रलोक चेहरे की है और केंद्रीय नेतृत्व से उनकी नज़दीकी है लेकिन प्रशासनिक अनुभव की कमी एक कमज़ोरी मानी जाती है।

 

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अब असली बात यह है कि बीजेपी इनमें से किसी एक नाम पर मुहर लगाएगी, यह अभी तय नहीं है। पार्टी की परंपरा रही है कि चुनाव जीतने के बाद विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षक भेजे जाते हैं और वहीं नाम तय होता है। कई बार चौंकाने वाले नाम भी सामने आए हैं। महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस से लेकर मध्य प्रदेश में मोहन यादव तक, इसके उदाहरण मौजूद हैं।

 

फिलहाल, गिनती जारी है। आधिकारिक नतीजे शाम तक साफ़ होंगे लेकिन एक बात तय है, अगर रुझान नतीजों में बदले, तो बंगाल का राजनीतिक नक्शा हमारी आँखों के सामने बदलने वाला है। अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसका जवाब अगले कुछ दिनों में मिलेगा।


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