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ओबेसिटी और ओवरवेट में होता है महीन अंतर, जानें कारण और बचाव

मोटापे की बीमारी से कई लोग परेशान है। इस बीमारी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शो 'मन की बात' में चर्चा की थी। आइए जानते हैं मोटापा बढ़ने का मुख्य कारण क्या है और इससे कैसे बचाव कर सकते हैं।

Obesity

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Freepik)

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ओबेसिटी एक ऐसी बीमारी है जिससे दुनियाभर के लोग परेशान है। साल 2022 के आंकड़े के अनुसार, विश्व में हर 8 में से 1 व्यक्ति मोटापे से पीड़ित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शो 'मन की बात' में ओबेसिटी के बारे में बात की थी। उन्होंने अपने कार्यक्रम में कहा था कि ओबेसिटी को कम करने के लिए हर व्यक्ति को 10 प्रतिशत तेल का कम इस्तेमाल करना है। उन्होंने अपने इस अभियान से 10 लोगों को जोड़ा है। आइए जानते हैं ओबेसिटी और ओवरवेट में क्या अंतर होता है। 

 

अधिक वजन (Overweight) का मतलब शरीर में आवश्यकता से अधिक चर्बी जमा होना है। जब यह चर्बी इतनी अधिक हो जाती है कि स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालने लगे, तो इसे मोटापा (Obesity) कहा जाता है। मोटापे एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से टाइप 2 डायबिटीज, हृदय संंबंधी बीमारियां, सांस फूलना समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता।

 

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BMI से पता करें ओवर वेट और ओबेसिटी

 

आप अधिक वजन और मोटापे को बॉडी मास इंडेक्स से माप सकते हैं। WHO के अनुसार बॉडी मास इंडेक्स अगर 25 या उससे ज्यादा है तो आपका वजन अधिक है। अगर बीएमआई 30 या उससे ज्यादा है तो आप मोटापे के शिकार हैं। बच्चों में मोटापे की पहचान उनकी उम्र और हाईट के हिसाब से की जाती है।

 

मोटापे का कारण

 

मोटापे होने का मुख्य कारण हाई कैलोरी डाइट के सेवन की वजह से होता है। मोटापा का मुख्य कारण तली भूनी चीजों का सेवन करना है। इसके अलावा फिजिकल एक्टिविटी कम करना, घंटों एक ही जगह पर बैठे रहना है। तनाव की वजह से भी मोटापा बढ़ता है।

 

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मोटापे से होने वाली बीमारियां

 

हृदय रोग और हाई ब्लड प्रेशर
टाइप-2 डायबिटीज
कैंसर का खतरा बढ़ता है
सांस से जुड़ी समस्याएं, जैसे नींद में रुकावट (स्लीप एपनिया)
हड्डियों और जोड़ों की समस्याएं
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव, जैसे डिप्रेशन और आत्मसम्मान में कमी

 

ओबेसिटी और ओवरवट की समस्या को हर व्यक्ति हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करके कम कर सकता है।

 

मोटापे को कैसे कम करें

 

प्रेग्नेंसी के दौरान संतुलित वजन बढ़ाएं।
6 महीने तक शिशु को मां का दूध पिलाएं। 2 साल तक स्तनपान जारी रखें।
बच्चों को हेल्दी चीजें खिलाएं, फिजिकल एक्टिविटी के लिए जागरूक करें।
रोजाना 30 से 35 मिनट के लिए एक्सरसाइज करें।
पर्याप्त मात्रा में नींद लें और तनाव लेने से बचें।
रेगुलर हेल्थ चेकअप करवाएं।
गंभीर मोटापे की बीमारी में सर्जरी करवाने की सलाह दी जाती है।

 

Disclaimer: यह आर्टिकल इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों और सामान्य बातचीत पर आधारित है। खबरगांव इसकी पुष्टि नहीं करता है। विस्तृत जानकारी के लिए आप अपने किसी डॉक्टर की सलाह लें।

 
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