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'तय लिमिट से ज्यादा टिकट क्यों बेचते हैं?' दिल्ली HC ने रेलवे से पूछा

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर पिछले सप्ताह हुई भगदड़ को लेकर केंद्र और भारतीय रेलवे को कड़ी फटकार लगाई। भगदड़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी।

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दिल्ली हाईकोर्ट, Photo credit: PTI

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नई दिल्ली रेलवे स्टेशन हादसे पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। भगदड़ में गई 18 लोगों की मौत पर अदालत ने केंद्र और रेलवे को कड़ी फटकार लगाई है। जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने सवाल किया कि रेलवे एक कोच में तय लिमिट से अधिक टिकट क्यों बेच रहा है? इस पर नाराज अदालत ने केंद्र और रेलवे से जवाब मांगा।

 

दरअसल, दिल्ली स्थित वकीलों, उद्यमियों और पेशेवरों के संगठन अर्थ विधि द्वारा अधिवक्ता आदित्य त्रिवेदी और सुभी पास्टर के माध्यम से एक याचिका दायर की गई। इस याचिका में रेलवे अधिनियम, 1989 के प्रावधानों, विशेष रूप से धारा 57 और 147 के कार्यान्वयन के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है।

 

क्या है धारा 57?

बता दें कि धारा 57 के तहत, रेलवे को प्रत्येक डिब्बे में यात्रियों की अधिकतम संख्या तय करनी होती है और प्रत्येक डिब्बे के अंदर या बाहर हिंदी, अंग्रेजी और उस क्षेत्र में इस्तेमाल की जाने वाली एक या अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में उस संख्या को पेश करना होता है। धारा 147 अतिक्रमण से संबंधित है, जिसमें छह महीने तक की जेल की सजा का प्रावधान है। ऐसे में जनहित याचिका में न्यायालय से अधिकारियों को अधिनियम के तहत मुआवजा देने की भी मांग की गई है।

 

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'पहले से कानून से बंधे हुए हैं?'

भारत ीय रेलवे की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी निर्देश की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वे पहले से ही कानून से बंधे हुए हैं। सॉलिसिटर मेहता ने आश्वासन दिया कि रेलवे बोर्ड इस मुद्दे पर विचार करेगा। कोर्ट ने सुझाव दिया कि रेलवे बोर्ड अपने जवाब में प्रावधानों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों को शामिल कर सकता है।

 

सॉलिसिटर मेहता की कोर्ट से अपील

मेहता ने कहा, 'रेलवे को आम लोगों के लाभ और सुरक्षा के लिए जनरल क्लास के अनरिजर्व टिकट जारी करने के लिए गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया जाए। हमने इस संबंध में पहले ही एक सर्कुलर जारी कर दिया है लेकिन कुछ गरीब लोग वहां आकर बैठ जाते हैं। हमारे पास देश-विशिष्ट मुद्दे हैं। व्यस्त घंटों के दौरान, ऐसे मामले सामने आते हैं। रेलवे इस सवाल पर विचार करेगा। इसके अलावा पहले से दिए गए मुआवजे को निर्देशित किया जाए। बेशक, यह पर्याप्त नहीं हो सकता। हम जानमाल के नुकसान का सम्मान करते हैं।'

 

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याचिका में क्या?

दरअसल, जनहित याचिका में कहा गया है कि 'एकस्ट्रा कोच और टिकटों की इतनी बिक्री सीधे तौर पर अराजकता और जानमाल के नुकसान में योगदान देता है। यह घटना 'भीड़ नियंत्रण और अनरिजर्व कैटगरी में टिकट जारी करने के प्रबंधन में रेलवे अधिकारियों की ओर से घोर लापरवाही को उजागर करती है।' पीक सीजन के दौरान इतनी जनरल क्लास की टिकट बिक्री तेजी से करना भीड़ को आमत्रिंत करता है। गाइलाइंस की कमी और भीड़ पर नियंत्रण न होना जीवन के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।'

 

भगदड़ वाले दिन इतनी टिकट क्यों बेची गई?

जनहित याचिका में कहा गया है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्रतिदिन शाम 6 बजे से 8 बजे के बीच औसतन 7,000 टिकट बुक किए जाते हैं। घटना के दिन यह संख्या बढ़कर 9,600 सामान्य श्रेणी के टिकट हो गई। भारत संघ, रेल मंत्रालय के सचिव, भारतीय रेलवे उत्तरी क्षेत्र, रेलवे बोर्ड, रेलवे सुरक्षा के मुख्य आयुक्त और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के नाम जनहित याचिका में शामिल किए गए हैं। कोर्ट ने सभी से याचिका में उठाए गए मुद्दों पर जवाब मांगते हुए रेलवे को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है। बता दें की मामले की सुनवाई 26 मार्च को तय की गई है। 


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