'आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दिन है..', बेटे की मौत पर बोले अनिल अग्रवाल
वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल की 49 साल की उम्र में मौत हो गई। अनिल ने बेटे की मौत की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा किया है।

अनिल अग्रवाल और उनके बेटे: Photo Credit: X handle/ Anil Agarwal
देश के उद्योग जगत और सामाजिक क्षेत्र से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। उद्योगपति अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया। 49 वर्षीय अग्निवेश हाल ही में अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए हादसे के बाद न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनकी हालत में सुधार हो रहा था। परिवार को उम्मीद थी कि खतरा टल चुका है लेकिन अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने उनकी जान ले ली। अनिल अग्रवाल वेदांता ग्रुप के मालिक है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अनिल अग्रवाल के बेटे के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने बेटे के निधन की जानकारी साझा करते हुए इसे अपने जीवन का सबसे अंधकारमय दिन बताया। उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए अपने बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयान करना संभव नहीं है। अग्निवेश न सिर्फ एक सफल उद्योगपति थे, बल्कि खेल, संगीत और सामाजिक सरोकारों से जुड़े एक संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में भी जाने जाते थे।
यह भी पढ़ें: इस दिन से शुरू होगी घरों की गिनती, 2027 की जनगणना का नोटिफिकेशन जारी
https://twitter.com/AnilAgarwal_Ved/status/2008937277184233619
अनिल अग्रवाल ने बेटे की मौत पर क्या कहा?
अनिल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर दुख जाहिर करते हुए लिखा, 'आज मेरी जिंदगी का सबसे अंधकारमय दिन है। मेरा प्यारा बेटा अग्निवेश हमें बहुत जल्दी छोड़कर चला गया। वह सिर्फ 49 साल का था। पूरी तरह स्वस्थ, जिंदगी से भरपूर और बड़े-बड़े सपनों वाला। अमेरिका में स्कीइंग के दौरान हुए एक हादसे के बाद वह न्यूयॉर्क के माउंट साइनाई अस्पताल में भर्ती था और उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा था। हमें लगा था कि सबसे मुश्किल वक्त निकल चुका है लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अचानक आए कार्डियक अरेस्ट ने हमारे बेटे को हमसे छीन लिया।'
'मैं ये दर्द बयान नहीं कर सकता..'
अनिल अग्रवाल ने पोस्ट में आगे लिखते हुए कहा, 'कोई भी शब्द उस दर्द को बयान नहीं कर सकता, जब किसी माता-पिता को अपने ही बच्चे को अलविदा कहना पड़े। एक बेटे को अपने पिता से पहले नहीं जाना चाहिए। यह नुकसान हमें अंदर से तोड़ चुका है और हम अब भी इसे समझने की कोशिश कर रहे हैं।'
यह भी पढ़ें-- दो बातें, जो 2027 की जनगणना को बनाती हैं सबसे खास; 2011 से क्या कुछ अलग होगा?
अनिल ने याद किए बेटे के पूराने दिन
अनिल ने बेटे के पुराने दिन को याद करते हुए लिखा, 'मुझे आज भी वह दिन याद है जब 3 जून 1976 को पटना में अग्नि का जन्म हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार में जन्म लेकर वह एक मजबूत, संवेदनशील और उद्देश्यपूर्ण इंसान बना। वह अपनी मां की जिंदगी की रोशनी था, एक जिम्मेदार भाई, भरोसेमंद दोस्त और एक ऐसा सौम्य इंसान, जिसने जिससे भी मुलाकात की, उसका दिल छू लिया।'
'अग्निवेश कई रूपों में जाना जाता था, एक खिलाड़ी, एक संगीत प्रेमी और एक लीडर। उसने मेयो कॉलेज अजमेर से पढ़ाई की फिर फुजैराह गोल्ड जैसी बेहतरीन कंपनी की स्थापना की, हिंदुस्तान जिंक का चेयरमैन बना और अपने साथ काम करने वालों का सम्मान जीता। इन सभी उपलब्धियों से बढ़कर वह हमेशा एक सादा, गर्मजोशी से भरा और इंसानियत से जुड़ा हुआ व्यक्ति रहा।'
पोस्ट में अनिल ने बेटे के प्रति बताया संबंध
अनिल ने अपने बेटे के साथ आपसी रिश्ते की चर्चा करते हुए कहा, 'मेरे लिए वह सिर्फ मेरा बेटा नहीं था। वह मेरा दोस्त था। मेरा गर्व था। मेरी पूरी दुनिया था। मैं और किरण पूरी तरह टूट चुके हैं। फिर भी, इस गहरे दुख के बीच हम खुद को यह याद दिलाते हैं कि वेदांता में काम करने वाले हजारों युवा भी हमारे ही बच्चे हैं।'
'अग्निवेश आत्मनिर्भर भारत के सपने में गहराई से विश्वास करता था। वह अक्सर मुझसे कहता था, पापा, हमारे देश में किसी चीज की कमी नहीं है। फिर हम किसी से पीछे क्यों रहें?'
उन्होंने कहा, 'हम दोनों का एक साझा सपना था कि कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी बच्चे को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े, हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो और हर युवा भारतीय को सम्मानजनक काम मिले। मैंने अग्नि से वादा किया था कि हम जो भी कमाएंगे, उसका 75 प्रतिशत से ज्यादा समाज को लौटाएंगे। आज मैं उस वादे को फिर से दोहराता हूं और और भी सादा जीवन जीने का संकल्प लेता हूं।'
अनिल ने दिया सबको धन्यवाद
अनिल ने पोस्ट के अंत में लिखा, 'उसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी थी। कई सपने अभी पूरे होने बाकी थे। उसकी कमी उसके परिवार और दोस्तों के दिलों में एक ऐसा खालीपन छोड़ गई है, जिसे भर पाना मुश्किल है। हम उसके सभी दोस्तों, सहकर्मियों और शुभचिंतकों का धन्यवाद करते हैं, जो हमेशा उसके साथ खड़े रहे। बेटा, तुम हमारे दिलों में, हमारे काम में और उन सभी जिंदगियों में हमेशा ज़िंदा रहोगे, जिन्हें तुमने छुआ है। मैं नहीं जानता कि तुम्हारे बिना इस रास्ते पर कैसे चलूंगा लेकिन मैं तुम्हारी रोशनी को आगे बढ़ाने की पूरी कोशिश करूंगा।'
और पढ़ें
Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies
CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap


