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उद्धव और राज ठाकरे का नाम आते ही चिढ़ गए शिंदे, फिर बोले…

एकनाथ शिंदे से पत्रकार ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक साथ आने को लेकर दिए गए बयान के बारे में पूछा। इस पर शिंद चिढ़े हुए से नजर आए।

Eknath Shinde। Photo Credit: PTI

एकनाथ शिंदे । Photo Credit: PTI

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महाराष्ट्र की राजनीति कभी भी ठंडी नहीं पड़ती। कुछ दिन पहले विधानसभा चुनाव को लेकर गहमागहमी थी, उसके बाद शपथ ग्रहण को लेकर तो अब पुराने बिछड़े हुए दो भाइयों उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के एक होने को लेकर। कारण भी दोनों के एक ही हैं- महाराष्ट्र के हित में एक साथ आना है।

 

हालांकि, मौजूदा स्थिति में शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत करके उनकी पार्टी को तोड़ने वाले शिंदे ने बीजेपी के साथ मिलकर ‘महायुति’ गठबंधन बनाया, लेकिन रविवार को वह तब अचानक असहज हो गए जब उनसे सवाल पूछा गया कि ठाकरे भाइयों के एक साथ आने की कितनी संभावना है।

 

सतारा स्थित अपने पैतृक गांव के दौरे पर एक पत्रकार ने शिंदे से उद्धव और राज ठाकरे की हाल की बयानों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी।

 

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चिढ़े हुए नजर आए शिंदे
वीडियो में दिख रहा कि उपमुख्यमंत्री शिंदे सवाल पूरा होने से पहले ही चिढ़े हुए नज़र आए। शिंदे ने माइक को दूर करते हुए पत्रकार पर भड़कते हुए कहा कि काम की बात करो। वहीं मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस संभावित मिलन पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी और कहा, ‘अगर दोनों एक साथ आते हैं तो हमें खुशी होगी, क्योंकि जब लोग अपने मतभेद खत्म करते हैं, तो यह अच्छी बात होती है। मैं इससे ज़्यादा क्या कह सकता हूं?’

 

एक दिन पहले ही राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने एक साथ आने को लेकर बयान दिए थे। एक पॉडकास्ट में फिल्म निर्माता महेश मांजरेकर से बातचीत में राज ठाकरे ने महाराष्ट्र के लिए पुराने विवाद भूलने की इच्छा जताई। राज ठाकरे ने कहा, ‘जब बड़े मुद्दे सामने होते हैं, तब हमारे आपसी झगड़े छोटे हो जाते हैं। महाराष्ट्र और मराठी लोगों के लिए हमारे बीच के मतभेद कोई मायने नहीं रखते।’

 

इसके जवाब में उद्धव ने भी उसी तरह का संकेत देते हुए कहा, ‘मैं भी छोटे-छोटे झगड़ों को किनारे रखकर मराठी समाज के हित में साथ आने के लिए तैयार हूं।’

 

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नई शिक्षा नीति का विरोध

इन दोनों दूर हो चुके भाइयों के बीच मेल-मिलाप के सकारात्मक संकेत तब आए हैं जब महाराष्ट्र में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की जा रही है। इस नीति के तहत बीजेपी नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी अनिवार्य भाषा बना दिया है।

 

उद्धव और राज ठाकरे, दोनों ने इस फैसले की आलोचना की है और इसे मराठी भाषा के लिए खतरा बताया है।


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