logo

मूड

ट्रेंडिंग:

जीविका दीदियों को चुनावी जीत बाद कैसे इनाम दे रही नीतीश सरकार? समझिए

बिहार विधानसभा चुनावों में विपक्ष से लेकर सत्तारूढ़ दल ने जीविका दीदियों को लुभाने के लिए कई वादे किए थे। एनडीए को इसका फायदा भी पहुंचा था।

Jeevika Didi

जीविका दीदी। Photo Credit: JDU/X

शेयर करें

google_follow_us
Advertisement

संजय सिंह, पटना: बिहार की राजनीति में आधी आबादी की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस बार के भी विधानसभा चुनाव में आधी आबादी ने एनडीए की झोली में बंपर वोट डाले। चुनाव के पहले जीविका दीदियों को रोजगार शुरु करने के लिए दस दस हजार रुपये दिए गए थे। अब चुनाव जीतने के बाद जीविका दीदियों के लिए सरकार ी दफ्तरों में कैंटीन खोलने की घोषणा की जा रही है। यह विपक्ष भी जानता है कि चुनावी माहौल बनाने में जीविका दीदियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

नीतीश कुमार जब पहली बार बिहार की सत्ता में आए थे तब उनके मन में विचार आया था कि महिलाओं को संगठित कर उनके विकास के लिए कुछ किया जाय। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की सहायता से 2006-7 में जीविका का काम शुरू किया गया। इसका मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर आत्मनिर्भर बनाना था। 

यह भी पढ़ें: बिहार तक कैसे पहुंचा सबसे बड़ा शिवलिंग? 40 दिन का सफर और 210 टन वजन

जीविका दीदियों को क्या काम दे रही सरकार?

जीविका दीदियां, अपने स्वरोजगार के साथ साथ उत्पाद तैयार कर कई लोगों को रोजगार भी दे रही हैं। महिलाएं आर्थिक रुप से सशक्त होने के साथ साथ राजनीतिक रुप से जागृत भी हुई है। इस बार के विधानसभा चुनाव में जीविका दीदियों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई। चुनाव के पहले प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी जीविका दीदियों को आकर्षित करने के लिए कई घोषणाएं भी कीं, लेकिन जीविका दीदियों का साथ एनडीए को ही मिला। नई सरकार बनने के बाद जीविका दीदियों को अस्पताल, पुलिस लाइन और राज्य के महत्वपूर्ण बस अड्डों पर भोजनालय चलाने का मौका दिया जा रहा है। 

चुनाव के केंद्र में रहीं हैं जीविका दीदियां

विधानसभा चुनाव के दौरान पक्ष और विपक्ष के लिए जीविका दीदियां महत्वपूर्ण हो गई थी। उनको लुभाने के लिए कई तरह की घोषणाएं की गई। प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तो यहां तक कह दिया कि यदि उनकी सरकार बनती है तो हर महीने 30 हजार रुपया वेतन के रुप में दिया जाएगा। इसके साथ ही उनके सारे लोन माफ कर दिए जाएंगे, लेकिन चुनाव से पहले एनडीए ने नहला पर दहला मार दिया। रोजगार शुरु करने के लिए आर्थिक सहायता के रुप में 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दे दी गई। इसके साथ यह भी कहा गया कि जिनका काम बेहतर होगा, उनको दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इस घोषणा के बाद विपक्ष का खेल बिगड़ गया। 

यह भी पढ़ें: किसी ने कहा- जीभ काट दो, कोई बोला- 10 लाख का इनाम; बिहार में क्यों मचा हंगामा?

ताकतवर कैसे बनी जीविका दीदियां? 

आर्थिक रुप से कमजोर महिलाओं के लिए शुरु की गई इस योजना से एक करोड़ 40 लाख बहु बेटियां जुड़ गई। ये बहन बेटियां 11 लाख स्वयं सहायता समूह संचालित कर रही है। इन्हें अबतक बैंकों से 57794 करोड़ तक का ऋण मिल चुका है। जीविका से जुड़ी 32 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन गई हैं। कई सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए जीविका दीदियों से मदद ली जाती है। इस संगठन से जुड़ी अधिकांश महिलाएं कमजोर वर्ग की हैं। इनका प्रभाव समाज के सभी वर्गों पर है। यही कारण है कि सरकार भी इस संगठन पर भरोसा करती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का भी मानना है कि जीविका दीदियों के प्रभाव के कारण ही आधी आबादी का ज्यादा वोट एनडीए को मिला।

चुनाव के बाद मिल रहा पुरस्कार 

चुनाव के दौरान रोजगार और पलायन एक प्रमुख मुद्दा था। चुनाव में प्रचंड बहुमत से जीतने के बाद राज्य सरकार जीविका से जुड़ी महिलाओं के लिए रोजगार देने के लिए तरह तरह का उपाय कर रही है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी यह घोषणा कर चुके हैं कि पुलिस लाइन में कैंटीन चलाने की जिम्मेदारी जीविका को दी जाएगी। 

यह भी पढ़ें: प्रशासन के पहुंचने से पहले लोगों ने ही ढहा दी मस्जिद, संभल में क्या हुआ?

अब नई जिम्मेदारी क्या मिली है?

अस्पतालों में मरीजों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए भोजन बनाने का काम जीविका दीदियों के जिम्मे ही है। अब परिवहन मंत्री श्रवण कुमार यह घोषणा कर चुके हैं कि राज्य के महत्वपूर्ण 19 बस डिपो में जीविका दीदी का रसोई खोला जाएगा। इससे यात्रियों और परिवहन कर्मियों को सस्ते दर पर पौष्टिक भोजन मिल पाएगा। सरकार जीविका दीदियों के माध्यम से आधी आबादी के बीच अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए तरह तरह का उपाय कर रही है।


और पढ़ें