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धर्म-कर्म
पूजा में इन चीजों का दोबारा उपयोग करें लेकिन इनसे रहें दूर
हिंदू धर्म में शास्त्रों के अनुसार, पूजा-पाठ में एक बार अर्पित की गई कुछ वस्तुएं ‘निर्मल्य’ हो जाती हैं और उनका दोबारा उपयोग दोषपूर्ण माना जाता है।
धर्म-कर्म
1 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है अंग्रेजी नववर्ष, क्या है इसके पीछे की वजह?
कई साल से पूरे विश्व में 1 जनवरी के दिन ही अंग्रेजी नववर्ष मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि इसी दिन न्यू ईयर क्यों मनाया जाता है।
धर्म-कर्म
अलग-अलग धर्मों में कब मनाया जाता है नया साल?
दुनिया में नया साल हर जगह 1 जनवरी से नहीं शुरू होता बल्कि अलग-अलग धर्म और संस्कृतियां अपने धार्मिक व सांस्कृतिक कैलेंडर के अनुसार अलग तारीखों पर नववर्ष मनाती हैं।
धर्म-कर्म
शादी के 27 गुणों का महत्व क्या है, नक्षत्रों से जुड़ा पूरा अर्थ
हिंदू ज्योतिष में शादी से पहले 36 गुणों का मिलान किया जाता है, जिसमें 27 या उससे अधिक गुणों का मिलना बेहद शुभ माना जाता है। गुणों के साथ-साथ नक्षत्रों का मेल भी विवाह की सफलता के लिए जरूरी होता है।
धर्म-कर्म
पुत्रदा एकादशी क्यों मनाते हैं? जानिए इसके पीछे की मान्यताएं
पुत्रदा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत फलदायी व्रत है जो संतान प्राप्ति और उससे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए रखा जाता है। वर्ष 2025 की आखिरी एकादशी 30 और 31 दिसंबर को मनाया जाएगा।
धर्म-कर्म
नक्षत्रों का जन्म कैसे हुआ था, कितने तरह के होते हैं नक्षत्र?
खगोल विज्ञान में नक्षत्र एक विशेष जगह रखते हैं। लोगों को नक्षत्रों के बारे में जानने की जिज्ञासा भी होती है। इसलिए इसके बारे में जानना ज्योतिष का एक महत्वपूर्ण भाग है।
धर्म-कर्म
ज्योतिष में महादशाएं क्या होती हैं, क्यों इसे बुरा मानते हैं लोग?
ज्योतिष में महादशा को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग इसे बहुत बुरा मानते हैं। लोगों में इसे लेकर कई भ्रांतियां है जिसे जानने की जरूरत है।
धर्म-कर्म
माघ में कल्पवास क्यों करते हैं लोग, किन देवताओं का यह महीना है?
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति के अनुसार माघ महीने के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास का बहुत महत्व माना जाता है। माघ महीने को सभी महीनों में सबसे उत्तम माना जाता है।
धर्म-कर्म
पार्वती के पुत्र थे कार्तिकेय फिर कृतिकाएं क्यों कहलाती हैं उनकी मां?
कार्तिकेय को कृतिका नक्षत्र की देवियों और पार्वती का पुत्र कहा जाता है। इसके पीछे की पौराणिक कथा को जानते हैं कि ऐसा क्यों?
धर्म-कर्म
साहिबजादों के बलिदान की वह कहानी जिसे आज भूल नहीं पाए सिख
10वें सिख गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे साहिबजादों को मुगल सेना ने गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहा गया लेकिन उन्होंने अपने धर्म को त्यागकर कोई और धर्म अपनाने से मना कर दिया था।
देश
क्या दुनिया से खत्म हो जाएंगे धर्म, किसकी बढ़ रही है संख्या?
दुनियाभर में धर्म को न मानने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ईसाई और इस्लाम के बाद इन लोगों की संख्या वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर पहुंच गई है।
धर्म-कर्म
वाराणसी, उज्जैन और हरिद्वार में उमड़ा भक्तों का सैलाब
सावन के पहले सोमवार के दिन देशभर में भारी शिवभक्तों की भीड़ को देखते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। वाराणसी, उज्जैन और हरिद्वार में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है।

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