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B-2 Bomber से बदला समीकरण?

तस्वीर: इंडियन एक्सप्रेस/योगेश पाटिल

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प्योत्र उफिम्त्सेव विद्युत चुम्बकीय तरंगों के बारे में एक शोध पत्र पर काम कर रहे थे, लेकिन सोवियत संघ के अन्य वैज्ञानिकों को उनके काम में कोई दिलचस्पी नहीं थी। यूएसएसआर में किसी ने भी उनके शोध पत्र पर ध्यान नहीं दिया। इस एपिसोड में आप देखेंगे कि कैसे यह शोध पत्र अमेरिका में लॉकहीड तक पहुँचा और कैसे डेनिस ओवरहोल्सर नामक एक इंजीनियर ने रूसी शोध पत्र पढ़ा। उस शोध पत्र से विचारों का उपयोग करके लकड़ी का उपयोग करके एक विमान का मॉडल बनाया। उस लकड़ी के मॉडल ने बाद में बी-2 बॉम्बर बनाने में मदद की। इस बॉम्बर का इस्तेमाल बाद में ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करने के लिए किया गया था। अधिक जानकारी के लिए वीडियो जरूर देखें।

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